कोरोना से घरेलू अर्थव्‍यस्‍था को बड़ी चोट, बैंकों से कई गुना ज्‍यादा रुपए निकाल रहे लोग

कोरोना से घरेलू अर्थव्‍यस्‍था को बड़ी चोट, बैंकों से कई गुना ज्‍यादा रुपए निकाल रहे लोग

कोरोना अब बैंकों की अर्थव्यवस्था पर भी कहर बरपा रहा है। महामारी से सहमे लोग निकासी ज्यादा कर रहे हैं और यहां तक की सावधि जमा (फिक्स डिपॉजिट) पूंजी भी तोड़ रहे हैं। बैंकों में जमा राशि में भी कमी आई है। जानकारों का कहना है कि निकासी और जमा का अनुपात 30-70 का हो गया है। (Corona causing major injury to domestic economy)

बैंकों से ताजा आंकड़े अभी नहीं मिले हैं पर दिसंबर से मार्च तक के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। नए साल की पहली तिमाही की रिपोर्ट आने पर स्थिति और साफ होगी। यह अंतर बढ़ सकता है। वहीं, बिहार में भी मार्च तक बैंकों में जमा राशि में तकरीबन 16 फीसदी की कमी आई है। बताया जाता है कि कोरोना संक्रमण का ग्राफ चढ़ने के साथ बैंकों से निकासी भी बढ़ गई है।

रिजर्व बैंक के साप्ताहिक डाटा से ज्ञात होता है कि कोरोना काल में बैंकों से उपभोक्ता बड़े पैमाने पर जमा राशि निकाल रहे हैं। शुरुआत में तो वे अपने बचत व चालू खातों (डिमांड डिपॉजिट्स) से पैसे की निकासी करते रहे परंतु अब फिक्स डिपॉजिट भी तोड़कर पैसे निकालने लगे हैं। रिजर्व बैंक के राष्ट्रीय स्तर पर जारी आंकड़ों को देखें तो 26 मार्च से 9 अप्रैल के बीच केवल डिमांड डिपॉजिट यानि बचत और चालू खातों में जमा राशि में 116655 करोड़ की कमी आई। जबकि उसके बाद 23 अप्रैल तक टाइम डिपॉजिट में 62887 करोड़ और डिमांड डिपॉजिट में 15962 करोड़ की कमी आई।

सारे जिलों में जमा से अधिक हो रही निकासी Corona causing major injury to domestic economy,

अप्रैल में हुई तेजी से निकासी

अब यदि बैंकों में जमा धनराशि के आंकड़ों को बिहार के परिप्रेक्ष्य में देखें तो 31 दिसंबर 2020 तक बिहार के तमाम सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में कुल जमा राशि 302498 करोड़ थी। वहीं यदि मार्च 2021 तक के त्रैमासिक डाटा पर नजर डालें तो बैंकों में जमा राशि में तकरीबन 16 फीसदी की कमी आई है। बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े सूत्रों की मानें तो पैसा निकालने की प्रवृत्ति में अप्रैल माह में और तेजी आई है, क्योंकि तब कोरोना संक्रमण बहुत तेजी से बढ़ रहा था।

बैंक काउंटरों और एटीएम पर दिख रही भीड़

कोरोना संकट के बीच बैंक ग्राहक अपने परिवार की आकस्मिक जरूरतों के लिए बैंकों से मोटी रकम की निकासी कर घर में सुरक्षित रख रहे हैं। खासकर इलाज में होने वाले खर्च को लेकर लोग आशंकित हैं। तमाम निजी अस्पताल नकद भुगतान ही ले रहे हैं। बीते दिनों सीबीडीटी ने भी अस्पतालों को दो लाख तक कैश भुगतान संबंधी आदेश जारी किया था। इन कारणों से डिजिटल बैंकिंग के बजाए बैंक काउंटरों और एटीएम पर ज्यादा भीड़ देखने को मिल रही है।

जिलों में जमा से अधिक हो रही निकासी

आपके अपने अखबार ने जब जिलों से स्थिति की जानकारी ली तो पता चला कि नालंदा में रोजाना करीब 12 करोड़ जमा तो 13 करोड़ से अधिक की निकासी हो रही है। वहीं, बेगूसराय के लीड बैंक मैनेजर मोती साह के अनुसार बैंकों में जमा की स्थिति में 80% तक की गिरावट हो गयी है, जबकि निकासी में 150% तक की बढ़ोतरी हुई है। उधर, गोपालगंज में करीब 20 करोड़ रुपए की निकासी हो रही है जबकि औसतन प्रतिदिन जिले के बैंकों में 10 करोड़ रुपए से भी कम राशि जमा हो रही है। लॉकडाउन से पूर्व हर रोज 18 करोड़ रुपए जमा होते थे। औरंगाबाद के लीड बैंक मैनेजर उपेंद्र चतुर्वेदी के अनुसार जमा होने वाली राशि में 20 से 30 प्रतिशत की कमी आई है।

बिहार में दिसंबर से मार्च के बीच बैंक की जमा राशि में 16 प्रतिशत की कमी आई है। बैंकों की लिक्विडिटी घटेगी तो उसका सीधा असर उनकी कर्ज देने की क्षमता पर पड़ेगा। इससे अर्थव्यवस्था भी प्रभावित होगी।
डीएन त्रिवेदी, संयुक्त सचिव, ऑल इंडिया बैंक ऑफीसर्स एसोसिएशन

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