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Raksha Bandhan 2022 Subh Muhurat: रक्षाबंधन शुभ मुहूर्त 2022: 11 और 12 दोनों दिन शुभ मुहूर्त, 12 अगस्त को उदया तिथि में बांधी जा सकेगी राखी, यहां जानें शुभ मुहूर्त

Raksha Bandhan 2022 Subh Muhurat for 11, 12 August: भाई-बहन के अटूट प्रेम और विश्वास के पर्व रक्षाबंधन को लेकर इस बार शुभ संयोग बन रहा है। बहनें सुविधा के मुताबिक 11 और 12 अगस्त को शुभ मुहूर्त में राखी बांध सकेंगी।

12 अगस्त को पूर्णिमा तिथि यानी सुबह 7.26 बजे तक राखी नहीं बांध सकेंगी

जो बहनें 12 अगस्त को पूर्णिमा तिथि यानी सुबह 7.26 बजे तक राखी नहीं बांध सकेंगी, उन्हें निराश नहीं होना है। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, उदया तिथि में पूरे दिन राखी बांधना शुभ है।

12 का पूरा दिन राखी बांधने के लिए शुभ है

ज्योतिर्विद पं. नरेंद्र उपाध्याय का कहना है कि लंबे समय बाद राखी बांधने का योग दो दिन है। 11 अगस्त को रात 8.25 बजे के बाद राखी बांधी जा सकती है। 12 का पूरा दिन राखी बांधने के लिए शुभ है। हालांकि 12 अगस्त को सुबह 7.25 से पहले राखी बांधना अधिक शुभ कारक होगा।

ज्योतिषाचार्य मनीष मोहन का कहना है कि

ज्योतिषाचार्य मनीष मोहन का कहना है कि जरूरी होने पर बहनें 11 अगस्त को ही रात 8.25 बजे के बाद राखी बांध सकती है। लेकिन उदया तिथि यानी 12 अगस्त को सुबह 7.25 बजे तक राखी बांधना ज्यादा शुभ कारक है।

दूर दराज रहने वाली बहनें या किसी अन्य वजह से 7.25 बजे तक राखी नहीं बांध पाने वाली बहनें निराश नहीं हों। उदया तिथि में पूरे दिन राखी बांधना शुभ है। कोशिश होनी चाहिए की सूर्यास्त से पहले भाई की कलाई पर राखी बांध लें।

Raksha bandhan 2022 : यहां जानें शुभ मुहूर्त, 12 अगस्त को मनाई जाएगी राखी, भद्रा का नहीं पड़ेगा साया

12 अगस्त को पूर्णिमा सुबह 7 बजकर 06 मिनट पर खत्म हो रही है। 11 अगस्त को पूरे दिन भद्रा जरुर है मगर भद्रा मकर राशि में होने से इसका वास पाताल लोक में है। जब भद्रा पाताल लोक में होती है तो यह शुभ फल देने में समर्थ होती है।

11 को भद्रा होने के कारण लोगों में संशय पैदा हुआ

अनेकों अन्य विद्वानों ने भी रक्षाबंधन 11 अगस्त को शास्त्रत्त् सम्मत माना है। ज्योतिषाचार्य डा. सुशांत राज ने कहा कि 11 को भद्रा होने के कारण लोगों में संशय पैदा हुआ। उनके मुताबिक भद्रा तो है लेकिन उसका कोई प्रभाव नहीं है।

राखी बांधने की विधि

  • धार्मिक मान्यताओं के अनुसार राखी बंधवाते समय भाई का मुख पूरब दिशा में और बहन का पश्चिम दिशा में होना चाहिए।
  • सबसे पहले बहनें अपने भाई को रोली, अक्षत का टीका लगाएं।
  • घी के दीपक से आरती उतारें, उसके बाद मिष्ठान खिलाकर भाई के दाहिने कलाई पर राखी बांधें।

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