यूनिवर्सिटी में 10 माह का होगा नया सत्र, एकेडमिक कैलेंडर जारी

यूनिवर्सिटी में 10 माह का होगा नया सत्र, एकेडमिक कैलेंडर जारी

विश्वविद्यालय के नये सत्र का एकेडमिक कैलेंडर 10 महीने का होगा। एक अक्टूबर 21 से कक्षाएं शुरू होंगी और जुलाई 22 तक सेशन को पूरा कर लेना है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने एडमिशन और परीक्षाओं को लेकर एकेडमिक कैलेंडर जारी किया है। कोरोना संक्रमण को देखते हुए यूजीसी ने इसे विश्वविद्यालयों के लिए जारी किया है। कहा गया है कि लंबित परीक्षाएं अगले महीने के अंत तक करा लें।

इसके लिए ऑनलाइन ऑफलाइन या अन्य किसी भी मोड का इस्तेमाल किया जा सकता है। इस दौरान कोविड-19 के प्रोटोकॉल का पालन करना होगा। कोरोना के कारण बीआरए बिहार विश्वविद्यालय की इस साल की एक भी परीक्षा नहीं हो सकी है। वहीं, पिछले साल को भी परीक्षा संबित हैं। यूजीसी ओर से जारी किये गये निर्देश के अनुसार स्नातक में एडमिशन की प्रक्रिया 30 सितम्बर तक पूरी करनी है।

लंबित हैं परीक्षाएं

सिलेबस पूरा करने के साथ परीक्षाएं भी करा लेनी है विवि को लंबित परीक्षाओं को 31 अगस्त तक करा लेने का आदेश

यूजीसी ने कहा है कि स्नातक में एडमिशन की प्रक्रिया 12 वीं बोर्ड रिजल्ट जारी होने के बाद की जाए सीबीएसई आईसीएसई व तमाम राज्य शिक्षा बोडों

के 12वीं के रिजल्ट 31 जुलाई कर दिए जाएंगे सत्र 2021-22 के छात्रों की कक्षा एक अक्टूबर से शुरू करनी है। यह सत्र तीन महीने देर से शुरू होगी। स्नातक का सत्र जुलाई से शुरू होता है। कोरोना के कारण अक्टूबर 2021 से शुरू होकर जुलाई 2022 तक चलेगा। इस सत्र के छात्रों परीक्षा भी इसी दौरान लेनी होगी। लंबित परीक्षाएं अगस्त के अंत तक विधि की लंबित परीक्षाएं अगले
महीने अगस्त तक पूरी करा लेनी है।

इसके लिए विधि को ऑनलाइन, ऑफलाइन या किसी भी मोड में परीक्षा लेने का निर्देश दिया गया इस दौरान स्नातक से लेकर पीजी सभी परीक्षाओं का आयोजन विधि को कर लेना है। हालांकि, केन्द्र व राज्य सरकार के निर्देशों का ख्याल रखते परीक्षा का कार्यक्रम तय करना है। भी
एक दशक में यूजीसी के एक एकेडमिक कैलेंडर का नहीं हुआ पालन शैक्षणिक सत्र को सुधारने के लिए पिछले एक दशक के दौरान यूजीसी के एक भी कैलेंडर का पालन नहीं हो सका।

10 साल में एक बार भी न समय से परीक्षा ही हो सकी और न ही रिजल्ट ही जारी हो सका है। यूजीसी ने कैलेंडर के अनुसार परीक्षा दिनों में रिजल्ट का प्रावधान किया है जबकि बिहार विधि में रिजल्ट में छह महीने का समय लग जाता है। विवि के दूरस्थ शिक्षा निदेशालय के वर्ष 2015-18 सत्र में नामांकन लेने वाले छात्रों की अबतक परीक्षा नहीं हो सकी है। पांच साल से अधिक समय से स्नातक व पीजी क्लीयर होने का इंतजार कर रहे हैं।

वोकेशनल प्रोफेशनल कोर्स की भी परीक्षा पांच वर्षों से अटकी है। वहीं, पीजी के रेगुलर मोड़ को नियमित करने के लिए दस साल में विधि ने दो बार दो साल के कोर्स को महज नौ महीने में पूरा कराया। इस दौरान चार परीक्षाएं ली गई, बाबजूद पीजी का सत्र डेद देर है। वर्ष 2018-20 की दो परीक्षा का रिजल्ट और अंतिम सेमेस्टर की परीक्षा अब भी लंबित है।

वहीं, स्नातक के वर्ष 2019 में नामांकन लेने वाले छात्रों की दो साल बाद एक भी परीक्षा नहीं हो सकी। इसके अलावा होम्योपैथी कोर्स का सत्र एक साल पीछे है।

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