पीजी तक छात्राओं को निःशुल्क शिक्षा, मगर डेवलपमेंट के नाम पर हर साल 15 करोड़ की वसूली कर रहा बिहार विश्वविद्यालय

पीजी तक छात्राओं को निःशुल्क शिक्षा, मगर डेवलपमेंट के नाम पर हर साल 15 करोड़ की वसूली कर रहा बिहार विश्वविद्यालय

बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के पीजी विभागों सहित अंगीभूत व संबद्ध कॉलेजों ने पिछले छह साल में करीब छह लाख गर्ल्स व एससी-एसटी स्टूडेंट्स से फीस वसूल लिये, दरअसल, हर साल स्नातक व पीजी में ढाई लाख से अधिक विद्यार्थियों का एडमिशन होता है. इसमें एक लाख से अधिक एससी-एसटी व छात्राएं रहती है.

हर साल करीब 15 करोड़ रुपये छात्राओं के साथ ही एससी-एसटी छात्रों से लिये जा रहे.

वर्ष 2015 के बाद से ही पीजी स्तर तक निःशुल्क शिक्षा लागू है. यानि, इनसे किसी तरह की फीस नहीं लेनी है. लेकिन, कॉलेजों ने केवल ट्यूशन फीस के नाम पर मामूली राहत देकर डेवलपमेंट फीस के रूप में एक से तीन हजार रुपये वसूल लिये औसत 1500 रुपये भी जोड़ दिया जाये तो हर साल करीब 15 करोड़ रुपये छात्राओं के साथ ही एससी-एसटी छात्रों से लिये जा रहे. सरकार का निर्देश है कि छात्राओं के साथ ही एससी-एसटी छात्रों को निःशुल्क शिक्षा दी जाए. विवि के माध्यम से कॉलेज डिमांड भेजेंगे, तो सरकार फीस प्रतिपूर्ति देगी.

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हाइकोर्ट में दाखिल है जनहित याचिका

छात्राओं व एससी-एसटी से फीस लेने के मामले हाइकोर्ट में रंजीत पंडित ने राज्य सरकार व अन्य के खिलाफ जनहित याचिका पिछले साल दायर की थी. कोर्ट के आदेश पर सरकार ने सभी विश्वविद्यालयों से वर्ष 2015 के बाद ली गयी फीस की रिपोर्ट मांगी थी. बीआरए बिहार विवि ने भी कई कॉलेजों की रिपोर्ट लेकर सरकार को भेज दी है. सभी ने केवल ट्यूशन फीस में ही छूट दी है.

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एडमिशन के समय 50 फीसदी फीस देने का प्रस्ताव

सरकार की ओर से कॉलेजों को एडमिशन के समय जुलाई में ही 50 फीसदी फीस प्रतिपूर्ति एडवांस देने का प्रस्ताव है, शेष 50 फीसदी अक्तूबर में यूटिलाइजेशन मिलने के बाद दिया जायेगा. विवि के एक पूर्व अधिकारी के अनुसार फरवरी में राज्य स्तर पर प्रधान सचिव की अध्यक्षता में बैठक हुई थी, जिसमें इस पर सहमति बन गयी, हालांकि उस पर अमल होता, तब तक लॉकडाउन लग गया.

• एससी-एसटी व गर्ल्स स्टूडेंट्स की पीजी की माफ है फीस

● विश्वविद्यालय व सरकार से स्पष्ट पोलिसी नहीं बन सकी

● यूजी-पीजी में करीब एक लाख एससी-एसटी व गर्ल्स स्टूडेंट्स

विश्वविद्यालय के डीएसडब्ल्यू डॉ अजीत कुमार ने बताया

बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के डीएसडब्ल्यू डॉ अजीत कुमार ने बताया कि एससी-एसटी व लड़कियों को स्नातकोत्तर तक निःशुल्क शिक्षा देनी है. कॉलेज डिमांड देंगे, तो सरकार प्रतिपूर्ति राशि देगी, पीजी विभाग व कॉलेजों से डिमांड लेकर सरकार को भेजा गया है. सभी कॉलेजों का फी स्ट्रक्चर एक समान नहीं होने के कारण भी प्रतिपूर्ति भुगतान में दिक्कत आ रही है. जल्द ही राज्य स्तर पर सभी विश्वविद्यालयों के लिए फी स्ट्रक्चर तय किया जायेगाजायेगा.

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