बिहार यूनिवर्सिटी में 19 साल पुराने सिलेबस से पढ़ रहे स्नातक के छात्र, अन्य यूनिवर्सिटी में भी 20 वर्ष से कोई बदलाव नहीं!

बिहार यूनिवर्सिटी में 19 साल पुराने सिलेबस से पढ़ रहे स्नातक के छात्र, अन्य यूनिवर्सिटी में भी 20 वर्ष से कोई बदलाव नहीं!

BIHAR UNIVERSITY SYLLABUS: बीआरए बिहार यूनिवर्सिटी के स्नातक के छात्र 19 वर्ष पुराने सिलेबस से पढ़ रहे हैं। बिहार यूनिवर्सिटी के अलावा दूसरे अन्य यूनिवर्सिटी में भी सिलेबस में 20 वर्ष से कोई बदलाव नहीं किया गया है, सिर्फ पटना वीमेंस कॉलेज ने अपना सिलेबस चार वर्ष पहले अपडेट किया था। सिलेबस पुराना होने से कई विषयों की किताबें बाजार में मिलनी मुश्किल हो गयी है।

छात्र परेशान सिलेबस अपडेट करने को कई बार हुई बैठक, पर फैसला नहीं यूनिवर्सिटी के कई कॉलेजों में बिना सिलेबस के ही चलती है पढ़ाई सिलेबस पुरानी होने के कारण किताब बाजार में मौजूद नहीं किताब की जगह गेस पेपर से काम चला रहे ज्यादातर छात्र।

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2018 में राजभवन ने स्नातक के सिलेबस को नये सिरे से बनाने के लिए एक कमेटी बनायी थी

बिहार यूनिवर्सिटी में वर्ष 2001 में स्नातक के सिलेबस में बदलाव किया गया था। उसके बाद सिलेबस में कोई नयी जानकारी नहीं जोड़ी गयी है। वर्ष 2018 में राजभवन ने स्नातक के सिलेबस को नये सिरे से बनाने के लिए एक कमेटी बनायी थी। इस कमेटी ने सभी यूनिवर्सिटी vको अलग-अलग सिलेबस बनाने की जिम्मेदारी दी थी। बिहार यूनिवर्सिटी को हिन्दी, इलेक्ट्रॉनिक्स, बॉटनी और परसियन विषय का सिलेबस तैयार करना था।

वर्ष 2017 में बिहार के सभी कॉलेज और यूनिवर्सिटी में पीजी के सिलेबस में बदलाव किया गया था

BIHAR UNIVERSITY SYLLABUS: वर्ष 2019 में यह सिलेबस तैयार कर राजभवन को भेज दिया गया, लेकिन इसके बाद न तो यूनिवर्सिटी ने और न राजभवन से इस बारे में आगे की पहल की। नया सिलेबस प्रतियोगी परीक्षाओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया था। वर्ष 2017 में बिहार के सभी कॉलेज और यूनिवर्सिटी में पीजी के सिलेबस में बदलाव किया गया था। यह सिलेबस सीबीसीएस (च्वाइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम) के तहत तैयार किया गया था।

90% छात्र गेस पेपर से चला रहे काम :

बाजार में पुराने सिलेबस की किताबें नहीं मिल रही हैं। कई प्रकाशकों ने सिलेबस की किताबों को छापना बंद कर दिया है। इससे छात्र परेशान हैं। आरबीबीएम कॉलेज की हिन्दी की शिक्षक सोनल ने बताया कि कविता और कहानी संकलन की किताबें बाजार में नहीं मिल रही हैं। इससे छात्राओं को गेस पेपर खरीदना पड़ता है। एमडीडीएम कॉलेज में फिजिक्स की शिक्षक डॉ. नवनीता ने बताया कि क्वांटम फिजिक्स और दूसरे चैप्टर की किताबें बाजार में नहीं हैं। सिलेबस पुराना हो जाने से इसका कोई मैटेरियल नहीं मिल रहा है।

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बिहार के दूसरे यूनिवर्सिटी में भी सिलेबस पुराना :

BIHAR UNIVERSITY SYLLABUS: बिहार के दूसरे यूनिवर्सिटी में भी सिलेबस पुराना होने से छात्रों को पढ़ाई में दिक्कत हो रही है। पाटलिपुत्र यूनिवर्सिटी के नालंदा कॉलेज के राजनीति विज्ञान के शिक्षक डॉ. विनीत लाल ने बताया कि सिलेबस पुराना होने से राजनीति विज्ञान की कई किताबें छात्रों को नहीं मिल पा रही हैं। इससे पढ़ाई में दिक्कत हो रही है। तिलकामांझी भागलपुर यूनिवर्सिटी के हिन्दी विभाग के अध्यक्ष प्रो. योगेंद्र ने बताया कि पुराने सिलेबस से ही छात्रों की पढ़ाई हो रही है।

मगध यूनिवर्सिटी के अंग्रेजी के शिक्षक डॉ. सुबोध कुमार झा ने बताया कि सिलेबस पुराना होने से अंग्रेजी की कई किताबों छात्रों के लिए नहीं हैं। ललित नारायण मिथिला यूनिवर्सिटी के हिन्दी के शिक्षक डॉ. अखिलेश कुमार मंडल ने बताया कि मिथिला यूनिवर्सिटी में भी सिलेबस अपडेट नहीं है। पुराने सिलेबस से ही पढ़ाई हो रही है।

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क्या कहते हैं यूनिवर्सिटी के

स्नातक स्तर पर अपडेट सिलेबस छात्रों को मिलना चाहिए। इससे छात्रों को प्रतियोगी परीक्षा में शामिल होने में दिक्कत नहीं होगी। पुराने सिलेबस से छात्र ऐसी परीक्षाओं में पिछड़ सकते हैं। विश्वविद्यालय को भी अपनी तरफ से सिलेबस को अपडेट करने के लिए पहल करनी चाहिए

-प्रो. अमरेंद्र नारायण यादव, पूर्व कुलपति, बिहार यूनिवर्सिटी

अगर सिलेबस में प्रतियोगी परीक्षा के हिसाब से अध्याय नहीं जोड़े जाते हैं तो वह अपना मकसद पूरा नहीं कर पाता है। इससे छात्रों को काफी कठिनाई होती है। पाठ्यक्रम ऐसा होना चाहिए, जिसमें रोजगार की संभावना हो।

-प्रो. रवींद्र कुमार रवि, पूर्व कार्यकारी कुलपति, बिहार यूनिवर्सिटी

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