स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड में 1.74 करोड़ का घोटाला: फर्जी कॉलेज के नाम पर स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के तहत 84 छात्रों के निकाले गए रुपये

स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड में 1.74 करोड़ का घोटाला: फर्जी कॉलेज के नाम पर स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के तहत 84 छात्रों के निकाले गए रुपये

स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना में 1.74 करोड़ रुपए से अधिक का घोटाला सामने आया है। फर्जी छात्र, फर्जी विषय, यहां तक की संस्थान भी फर्जी और स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के तहत 84 छात्रों के नाम पर निकले गए एक करोड़ 74 लाख 82 हजार 480 रुपये। बेगूसराय में फर्जी संस्थान मंडन मिश्र संस्कृत महाविद्यालय के नाम पर फार्मेसी, पॉलीटेक्निक, जीएनएम जैसे कई तकनीकी कोर्स में नामांकन कागज पर लेकर उनके नाम पर रुपए की निकासी कर ली गई।

घोटाले का मास्टरमाइंड मंडन मिश्र संस्कृत कॉलेज का निदेशक मोहम्मद फैजुद्दीन फरार चल रहा है। इस बाबत डीपीओ राजकमल ने बताया कि कॉलेज के निदेशक व थर्ड पार्टी एजेंसी पर एफआईआर की गई है। सरकार द्वारा जो राशि थर्ड पार्टी वेरिफिकेशन के लिए एजेंसी को दी जानी थी, उसे भी रोक लिया गया है। थर्ड पार्टी वेरिफिकेशन एजेंसी एमएस प्रीग्रीन गाडिंग प्राइवेट लिमिटेड, गुडगांव है।

घोटाले के मास्टरमाइंड और कॉलेज के निदेशक पर मुकदमा, फरार

समस्तीपुर निवासी मोहम्मद फैजुद्दीन ने बेगूसराय के भगवानपुर प्रखंड के संजात में कागज पर ही मंडन मिश्र संस्कृत कॉलेज की स्थापना की। इसमें सत्र 2019 और 22 में 84 छात्रों के नाम पर विभागीय मिलीभगत से रुपए की निकासी कर ली। जब राज्य शिक्षा वित्त निगम लिमिटेड के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी सह प्रबंध निदेशक ने मंडन मिश्र संस्कृत कॉलेज के 16 छात्र-छात्राओं के स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड मामले की जांच की तो इस घोटाले का खुलासा हुआ।

थर्ड पार्टी वेरिफिकेशन भी कागज पर ही कर लिया

किसी भी कॉलेज को स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड की राशि तब दी जाती है जब थर्ड पार्टी वेरिफिकेशन पूरी कर ली जाती है। योजना का लाभ देने के लिए पोर्टल पर संस्थान का नाम भी थर्ड पार्टी वेरिफिकेशन के बाद ही जोड़ा जाता है। लेकिन, इस मामले में पहले मंडन मिश्र संस्कृत कॉलेज का नाम पोर्टल पर दर्ज हुआ। इसके बाद थर्ड पार्टी वेरिफिकेशन के लिए एजेंसी की टीम पटना से चली, लेकिन बिना स्थल पर गए ही सभी दस्तावेज पर मुहर लगा दी।

बेगूसराय में बड़ा फर्जीवाड़ा मंडन मिश्र संस्कृत कॉलेज: पढ़ाई-फार्मेसी, पॉलीटेक्निक, जीएनएम जैसे तकनीकी विषय

जांच में पाया कि फैजुद्दीन द्वारा कॉलेज के संबद्धता के जो कागजात दिए गए थे, वे फर्जी थे। जिन छात्रों के नाम पर राशि ली, ऐसा कोई छात्र है ही नहीं। जबकि, 84 छात्रों की राशि फैजुद्दीन के कॉलेज के खाते में जा चुकी थी। इस संदर्भ में अपर सचिव शिक्षा विभाग, पटना को मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी व प्रबंध निदेशक ने 4 मार्च 2020 को सूचित किया था। इसके बाद वरीय अधिकारियों के निर्देश पर डीपीओ लेखा ने 18 मार्च 2020 को भगवानपुर थाने में केस दर्ज करवाया। इसमें फैजुद्दीन और थर्ड पार्टी जांच एजेंसी को आरोपी बनाया गया है। लेकिन, एक साल बाद भी कार्रवाई नदारद है।

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