BRABU Website Under Cyber Attack : बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय (बीआरएबीयू) की वेबसाइट के हैक होने का मामला अब गंभीर रूप ले चुका है। विश्वविद्यालय प्रशासन को 7 जुलाई से वेबसाइट पर संदिग्ध गतिविधियां नजर आ रही थीं, लेकिन हाल ही में इसकी सूचना औपचारिक रूप से इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) को दी गई। सूचना मिलते ही आईबी की पटना स्थित टीम विश्वविद्यालय पहुंची और जांच शुरू कर दी।
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जांच का दायरा और शुरुआती निष्कर्ष
आईबी टीम ने सबसे पहले विश्वविद्यालय के आईटी विभाग के अधिकारियों और वेबसाइट के तकनीकी प्रबंधकों से मुलाकात की। टीम ने सर्वर लॉग, लॉगिन रिकॉर्ड, डेटा ट्रांसफर हिस्ट्री और एडमिन पैनल एक्सेस से जुड़े सभी तकनीकी दस्तावेज जुटाए।
प्रारंभिक जांच में पाया गया कि हैकिंग के प्रयास कई बार किए गए और कुछ मौकों पर वेबसाइट का डाटा एक्सेस भी हुआ। इसके चलते आशंका है कि हैकरों ने महत्वपूर्ण जानकारी चुराने की कोशिश की होगी।
विदेशी हैकरों पर शक
आईबी सूत्रों के अनुसार, हमले की तकनीक और आईपी एड्रेस ट्रेसिंग से संकेत मिल रहे हैं कि इसके पीछे विदेशी साइबर अपराधियों का हाथ हो सकता है। कुछ डिजिटल सिग्नेचर्स ऐसे मिले हैं, जो पहले भी पड़ोसी देशों से जुड़े साइबर हमलों में पाए गए थे।
हालांकि, जांच टीम ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल सभी संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है और किसी निष्कर्ष पर पहुंचने में अभी समय लगेगा।
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विश्वविद्यालय प्रशासन की प्रतिक्रिया
बीआरएबीयू प्रशासन ने जांच एजेंसी को पूरा सहयोग देने का आश्वासन दिया है। वेबसाइट की सुरक्षा बढ़ाने के लिए तत्काल अतिरिक्त फायरवॉल, मल्टी-लेयर ऑथेंटिकेशन और डाटा एन्क्रिप्शन जैसे उपाय लागू किए गए हैं।
प्रशासन का कहना है कि वेबसाइट पर मौजूद सभी शैक्षणिक और प्रशासनिक डेटा का बैकअप सुरक्षित सर्वरों पर लिया गया है, जिससे किसी भी संभावित डेटा लीक से बचा जा सके।
फोरेंसिक और कानूनी कार्रवाई की तैयारी
आईबी टीम ने विश्वविद्यालय के सर्वर का फोरेंसिक परीक्षण शुरू कर दिया है। यदि जांच में अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध की पुष्टि होती है, तो यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर साइबर क्राइम इकाई और अन्य केंद्रीय एजेंसियों को सौंपा जाएगा।
साथ ही, यदि हैकिंग में किसी आंतरिक व्यक्ति की संलिप्तता पाई गई, तो उसके खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
छात्रों और कर्मचारियों में चिंता
विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर परीक्षा परिणाम, प्रवेश से जुड़ी जानकारी, छात्रवृत्ति के रिकॉर्ड और प्रशासनिक आदेश जैसी महत्वपूर्ण सूचनाएं उपलब्ध रहती हैं। इस घटना के बाद छात्रों और कर्मचारियों में डेटा चोरी और सेवाओं में बाधा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
आगे की राह
जांच एजेंसियों का मानना है कि आने वाले कुछ दिनों में इस साइबर हमले की प्रकृति और जिम्मेदारों के बारे में अधिक स्पष्ट जानकारी मिल सकती है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने आश्वस्त किया है कि छात्रों और कर्मचारियों की किसी भी संवेदनशील जानकारी से समझौता नहीं किया जाएगा।
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