सत्र दो साल लेट, एक भी कक्षा नहीं, प्रैक्टिकल में अटक रहे छात्र, छात्रों को उपकरण और केमिकल देखते ही पसीने छूटने लगे

सत्र दो साल लेट, एक भी कक्षा नहीं, प्रैक्टिकल में अटक रहे छात्र, छात्रों को उपकरण और केमिकल देखते ही पसीने छूटने लगे

बीआरए बिहार विवि के पार्ट वन की परीक्षा दे रहे छात्र केमेकिल रियेक्शन में फंस जा रहे हैं। पहली बार प्रैक्टिकल करने में उन्हें समझ ही नहीं आ रहा है कौन केमिकल किसके साथ थ रियेक्शन करेगा। इसके अलावा प्रैक्टिकल का पेपर लिखने में भी छात्रों को दिक्कत हो रही है। ये छात्र स्नातक के सत्र 2019-22 के हैं। इनके एडमिशन के बाद ही कॉलेज बंद हो गये। इसके बाद उनकी प्रैक्टिकल की कक्षा कभी नहीं हुई। कॉलेज के शिक्षकों का कहना है कि ऑनलाइन कक्षा में थ्योरी की तो पढ़ाई हुई, लेकिन प्रैक्टिकल नहीं हो सका। इस कारण छात्रों परीक्षा में परेशानी है है।

विवि के विभिन्न कॉलेजों में सत्र 2019-22 के छात्रों की स्नातक पार्ट वन की प्रैक्टिकल परीक्षा हो रही

इसके बाद थ्योरी पेपर की परीक्षा होगी। बिना क्लास व लैब गए परीक्षा देने में छात्रों को परेशानी आ रही है। परीक्षा के दौरान उपकरण और केमिकल देखते ही उनके पसीने छूटने लग रहे हैं। शिक्षकों ने बताया कि प्रैक्टिकल परीक्षा में कई छात्र ऐसे हैं जो कुछ भी समझ नहीं पा रहे हैं। वे बार-बार शिक्षकों से ही पूछ रहे हैं। वहीं, प्रैक्टिकल दे रहे छात्रों का कहना है कि जब कभी कथा ही नहीं हुई तो प्रैक्टिकल कैसे करें। इसलिए परीक्षा देने में दिक्कत हो रही है। शिक्षकों का कहना है कि छात्र सवाल के जवाब गलत लिख रहे हैं।

फिजिक्स व जूलॉजी में ज्यादा परेशानी

छात्रों को फिजिक्स और जूलॉजी के प्रैक्टिकल में ज्यादा परेशानी हो रही है। फिजिक्स के एक शिक्षक ने बताया कि छात्रों को अगर इलेक्ट्रिसिटी का प्रैक्टिकल कराया जा रहा है तो उन्हें यह भी पता नहीं कि किस मशीन का क्या फक्शन होता है। इसी तरह जूलॉजी में भी छात्र प्रैक्टिकल करने में फस जा रहे हैं। केमेस्ट्री के एक शिक्षक कहा कि छात्रों को नहीं पता कि किस कैमिकल से क्या रियेक्शन होता है।

पूछो नहीं, अपना-अपना लिखो सब…

पार्ट वन की प्रैक्टिकल परीक्षा के दौरान कॉलेजों में सोशल डिस्टेसिंग नहीं दिखी। कॉलेज में बॉटनी के बच्चों ने कहा, न क्लास हुई न ही प्रैक्टिकल, पहली बार देखी है लेब
प्रैक्टिकल के दौरान बुधवार को सभी छात्र एक दूसरे से एकदम बगल में बैठे थे प्रैक्टिकल में एक महिला और एक पुरुष शिक्षक की ड्यूटी लगी थी। छात्र बीच-बीच में बगल में ताकझाक कर रहे थे। इसे रोकने के लिए हर बार शिक्षक को उन्हें टोकना पड़ रहा था। वे छात्रों से कह रहे थे, पूछों नहीं अपना-अपना सब लिखो।

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