बिहार के सभी यूनिवर्सिटी की होगी जियो टैगिंग, बना इंस्टीट्यूशनल डेवलपमेंट प्लान, यहाँ जाने UGC ने क्या प्लान तैयार किया

बिहार के सभी यूनिवर्सिटी की होगी जियो टैगिंग, बना इंस्टीट्यूशनल डेवलपमेंट प्लान, यहाँ जाने UGC ने क्या प्लान तैयार किया

बिहार के सभी विश्वविद्यालयों की जियो टैगिंग की जाएगी। UGC ने विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के विकास के लिए इंस्टीट्यूशनल डेवलपमेंट प्लान तैयार किया है। इसके तहत सभी कुलपतियों को कहा गया है कि वह अपने विवि और कॉलेजों की जियो टैकिंग करें।

यूनिवर्सिटी के संसाधनों का भौतिक सत्यापन होगा

सभी विश्वविद्यालयों की हर वर्ष 30 जून को समीक्षा की जाएगी। यह समीक्षा यूजीसी के अलावा एनएचआरसी करेगी। इसमें यूनिवर्सिटी के संसाधनों का भौतिक सत्यापन होगा। यूजीसी ने विवि से कहा है कि वे जीआईएस एप्लिकेशन का इस्तेमाल करें। यूजीसी ने कहा है कि विश्वविद्यालयों और कॉलेजों की समीक्षा में देखा जाएगा कि उन्होंने जो रिपोर्ट भेजी है वह सही है या नहीं।

नैक मूल्यांकन में भी इस जियो टैकिंग की जरूरत पड़ेगी

जियो टैगिंग से विवि वार्षिक रिपोर्ट के साथ उसके सत्यापन के लिए विश्वविद्यालयों और कॉलेजों की फोटो और वीडियो भी भेजेंगे। नैक मूल्यांकन में भी इस जियो टैकिंग की जरूरत पड़ेगी। विवि और कॉलेजों की तरफ भेजे जाने वाले सेल्फ स्टडी रिपोर्ट का सत्यापन इससे की जाएगी। यूनिवर्सिटी को अपने यहां किए गए कामों की विस्तृत रिपोर्ट यूजीसी को देनी होगी। प्लान में कॉलेज और विश्वविद्यालय कैंपस को वाईफाई से जोड़ा जाएगा। इसका नेटवर्क सभी छात्रों के लिए सहज होना चाहिए। इसके लिए यूनिवर्सिटी में एक डाटा सेंटर भी खोला जाएगा।

कैंपस में रहेगी हरियाली और आग से बचाव के होंगे उपाय

विश्वविद्यालय के कैंपस में हरियाली रहेगी और आग से बचाव के उपाय किए जाएंगे। यूजीसी ने निर्देश दिया है विश्वविद्यालय के कैंपस में पर्यावरण संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाए। परिसर में कचरा मैनेजमेंट के लिए भी इंतजाम करने के साथ पानी की निकास की व्यवस्था की जाए। विवि में जो भी निर्माण हो उसे ग्रीन बिल्डिंग डिजाइन के तहत किया जाए।

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पीपीपी मॉडल का भी किया जाए इस्तेमाल

यूजीसी ने अपने जारी ड्राफ्ट में कहा है कि विवि के कैंपस के विकास के लिए होने वाले निर्माण कार्य में पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल का इस्तेमाल किया जाए। कैंपस के विकास में इससे ज्यादा लाभ हो सकता है इसके तहत काम करने के बाद विश्वविद्यालय को कैंपस के विकास में मानव बल की कम जरूरत पड़ेगी।

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